मलप्पुरम, केरल (28 नवंबर 2025): केरल के छोटे से गांव चुंगथारा की बेटी डॉ. रहना प्यासेरी ने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक टीम के साथ मिलकर ब्रह्मांड के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। स्पेन के CEFCA इंस्टीट्यूट में पोस्ट-डॉक्टरल फेलो डॉ. रहना ने दुनिया के सबसे दुर्लभ और विशाल “Enormous Lyman-Alpha Nebula” (ENLA) में से एक की खोज की है, जिसका नाम रखा गया है – RaJav Nebula (रहना + ज्वालामप्रा)।
RaJav नेबुला की खासियतें:
– हमारी मिल्की वे गैलेक्सी से 4 गुना बड़ा
– 11 अरब प्रकाश-वर्ष दूर स्थित (यानी हम ब्रह्मांड को उस समय देख रहे हैं जब उसकी उम्र आज की सिर्फ 20% थी)
– हाइड्रोजन, हीलियम के साथ-साथ भारी मात्रा में मेटल्स (धातु तत्व) वाली गैसें मौजूद
– एक नजदीकी क्वासर की तेज रेडिएशन से रोशनी करने वाला दुर्लभ लाइमन-अल्फा नेबुला
– अब तक खोजे गए ENLA श्रेणी के नेबुलाओं में सबसे चमकीला और विशाल में से एक
नाम कैसे पड़ा ‘RaJav’?
नेबुला का नाम रा (रहना का पहला अक्षर) + ज (ज्वालामप्रा ऑब्जर्वेटरी) मिलाकर रखा गया है। यह खोज स्पेन के ज्वालामप्रा एस्ट्रोफिजिकल ऑब्जर्वेटरी के आधुनिक टेलीस्कोप से प्राप्त डेटा के विश्लेषण से हुई।
डॉ. रहना प्यासेरी का प्रेरणादायक सफर
– जन्मस्थान: चुंगथारा, मलप्पुरम (केरल)
– शिक्षा: मार्थोमा कॉलेज → एम.जी. यूनिवर्सिटी कोट्टायम → इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, बेंगलुरु (PhD)
– विदेश में रिसर्च: शंघाई एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी (चीन) → अब CEFCA, स्पेन
– टीम: स्पेन, ब्राजील, चीन सहित 32 अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक
यह खोज क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
RaJav नेबुला हमें उस समय की झलक देता है जब ब्रह्मांड सिर्फ 2-3 अरब साल का था। यहां मौजूद भारी मात्रा में मेटल्स यह बताते हैं कि उस शुरुआती दौर में भी तारे बन रहे थे और भारी तत्व बनाकर विस्फोट कर रहे थे। यह हमारी समझ को बिग बैंग के बाद गैलेक्सी निर्माण के रहस्यों की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाता है।
