रांची: झारखंड में प्रकृति पर्व सरहुल पूरे उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर मुख्यमंत्री Hemant Soren अपने परिवार के साथ राजधानी रांची के आदिवासी हॉस्टल और सिरमटोली स्थित केंद्रीय सरना समिति परिसर पहुंचे, जहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
मुख्यमंत्री के साथ उनकी पत्नी और विधायक Kalpana Soren और उनके पुत्र भी मौजूद रहे। इस दौरान दोनों पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए, जिसने कार्यक्रम की सांस्कृतिक गरिमा को और बढ़ा दिया।
आदिवासी हॉस्टल में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री दंपति ने मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की समेत अन्य लोगों के साथ मांदर की थाप पर नृत्य कर पर्व की खुशी साझा की। कार्यक्रम के दौरान कल्पना सोरेन ने राज्यवासियों को सरहुल की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जैसे लाल और सफेद रंगों से वातावरण सजा है, वैसे ही लोगों के जीवन में खुशहाली और समृद्धि बनी रहे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आस्था और कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों से मिली इस परंपरा को आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रकृति के बिना जीवन संभव नहीं है। यही सृष्टि का आधार है और इसी में सबका अंत भी होता है। आदिवासी समाज की प्रकृति के प्रति गहरी आस्था दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है।
आदिवासी हॉस्टल में कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री सिरमटोली स्थित केंद्रीय सरना समिति परिसर पहुंचे, जहां उन्होंने लोगों का अभिवादन किया और प्रकृति संरक्षण के प्रति संकल्प दोहराने का आह्वान किया।
