रांची: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों द्वारा री-एडमिशन के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूली का मुद्दा फिर से गरमा गया है। अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि कई स्कूल अलग-अलग मदों में मनमानी फीस लेकर आर्थिक बोझ बढ़ा रहे हैं।
इस गंभीर समस्या को लेकर सोमवार को उपायुक्त की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी और शुल्क निर्धारण समिति के सदस्य शामिल हुए, इस दौरान अभिभावकों से प्राप्त शिकायतों पर विस्तार से विचार किया गया.।
अभिभावकों से प्राप्त शिकायतों पर विस्तार से विचार किया गया
शिकायतों में सामने आया कि कुछ निजी स्कूल री-एडमिशन के नाम पर अनावश्यक शुल्क वसूल रहे हैं। इसके अलावा, छात्रों को एक ही दुकान से यूनिफॉर्म और किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। अभिभावकों का यह भी कहना है कि एनसीईआरटी की किताबों की बजाय महंगे निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जिससे शिक्षा का खर्च बढ़ जाता है।
प्रशासन ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अगले सप्ताह जिले के सभी निजी स्कूल प्रबंधकों के साथ बैठक करने का निर्णय लिया है। इस बैठक में फीस संरचना में पारदर्शिता लाने और मनमानी पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
उपायुक्त ने साफ कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के नियमों का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही एनसीईआरटी की पुस्तकों को नजरअंदाज करने वाले संस्थानों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
अगले सप्ताह निजी स्कूल प्रबंधकों के साथ बैठक
इन सभी मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए समिति ने निर्णय लिया कि अगले सप्ताह जिले के सभी निजी स्कूलों के प्रबंधकों के साथ बैठक की जाएगी. इस दौरान स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे. जिससे कि फीस में पारदर्शिता लाई जा सके. साथ ही निजी स्कूलों पर किसी भी प्रकार की मनमानी पर रोक लगाई जा सके. RTE के नियमों का उल्लंघन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं: डीसी उपायुक्त ने बैठक में साफ कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के नियमों का उल्लंघन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जो स्कूल लगातार नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही, एनसीईआरटी की पुस्तकों को प्राथमिकता नहीं देने वाले स्कूलों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.
प्रशासन को उम्मीद है कि इन सख्त कदमों से निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी। हालांकि, पिछले अनुभवों को देखते हुए यह सवाल बना हुआ है कि क्या इस बार कार्रवाई जमीनी स्तर पर दिखेगी या फिर यह पहल केवल बैठकों तक सीमित रह जाएगी।
फिलहाल, इस पहल से अभिभावकों में उम्मीद जगी है कि शिक्षा के नाम पर हो रही अतिरिक्त वसूली पर अंकुश लगेगा और उन्हें राहत मिलेगी।
