New Delhi : दक्षिण अमेरिकी देश Venezuela ने भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा तेल शिपमेंट शुरू कर दिया है, जिसमें लगभग 20 लाख (2 मिलियन) बैरल तेल से भरे बड़े कार्गो जहाज़ भारत की ओर बढ़ रहे हैं। यह घटनाक्रम उस समय आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में सप्लाई चैन में बदलाव और राजनीति-व्यापार समीकरण दोनों तेज़ी से बदल रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, इस बार वेनेज़ुएला ने VLCC (Very Large Crude Carriers) नामक बेहद बड़े क्रूड टैंकरों को किराए पर लिया है, जो सामान्य से कहीं ज़्यादा तेल ढो सकते हैं। इन टैंकरों की क्षमता स्वेजमैक्स या अफ्रामैक्स टैंकरों की तुलना में दोगुना से चार गुना अधिक होती है, जिससे तेल के बड़े पैमाने पर चुस्त-दुरुस्त ढुलाई की उम्मीद है। यह भी पढ़ें : झारखंड कैबिनेट की बड़ी बैठक: 22 प्रस्तावों को मंजूरी, नेतरहाट स्कूल में नियुक्तियां अब JPSC या JSSC से
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, तीन VLCC जहाज़ों — निसोस केआ, निसोस किथनोस और अरज़ाना — को मार्च में वेनेज़ुएला के जोस टर्मिनल से तेल लोड करने के लिए स्लॉट मिला है और वे भारत की तरफ़ रवाना होने वाले हैं। इन कार्गो शिपों पर 20 लाख बैरल तक का कच्चा तेल लेकर आने की प्रक्रिया जारी है, जिससे भारत को सप्लाई का बड़ा वॉल्यूम मिल सकेगा।
एक और बड़ा टैंकर ओलंपिक लायन भी इसी महीने के अंत में वेनेज़ुएला से माल लोड करने के लिए तैयार देखा जा रहा है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में भारत की ओर तेल की डिलीवरी तेज़ हो सकती है और इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत कम होने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
इस कदम को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। कई वर्षों से अमेरिका के प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों के चलते वेनेज़ुएला का तेल व्यापार कठिनाइयों का सामना कर रहा था, लेकिन हाल के समय में नियमों में ढील दिए जाने और सप्लाई डील्स के कारण अब तेल का प्रवाह पुनः बहाल हो रहा है।
भारत में भी भारी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा कंपनियों ने इस अवसर को ध्यान में रखते हुए वेनेज़ुएला के डिस्काउंटेड क्रूड में रुचि दिखाना शुरू किया है। भारतीय रिफाइनरियों, जैसे कि Reliance Industries सहित कुछ अन्य कंपनियों ने भी बड़ी मात्रा में वेनेज़ुएला का हीवी क्रूड तेल खरीदने के समझौते किए हैं, जिससे सप्लाई डाइवर्सिफिकेशन और रूसी तेल पर निर्भरता को कम करने की दिशा में भी कदम उठाने की कोशिशें तेज हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बड़े शिपमेंट से न सिर्फ भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि वैश्विक तेल व्यापार में भी नई ट्रेडिंग लाइनें स्थापित हो सकती हैं। हालांकि, तेल की कीमत, अंतर्राष्ट्रीय मांग-आपूर्ति का समीकरण, और राजनीतिक प्रभाव इन परिस्थितियों पर आगे भी असर डाल सकते हैं।
