नई दिल्ली। Delhi High Court ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख Lalu Prasad Yadav को बड़ा झटका देते हुए ‘जमीन के बदले नौकरी’ (Land-for-Jobs) घोटाले से जुड़े मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में एफआईआर, आरोपपत्र और निचली अदालत के आदेशों में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।
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जस्टिस रविंदर दुडेजा की एकल पीठ ने लालू यादव की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने Central Bureau of Investigation (CBI) द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार मामले को निरस्त करने की मांग की थी।
लालू यादव की ओर से दलील दी गई थी कि सीबीआई ने जांच शुरू करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत आवश्यक पूर्व स्वीकृति नहीं ली थी, जिससे पूरी कार्रवाई अवैध हो जाती है। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
यह मामला भारतीय रेलवे में कथित तौर पर नौकरी देने के बदले जमीन लेने से जुड़ा है। सीबीआई ने मई 2022 में इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी Rabri Devi समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
इससे पहले भी हाई कोर्ट और Supreme Court of India दोनों ही इस मामले में सुनवाई रोकने से इनकार कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में अंतिम फैसला हाई कोर्ट द्वारा ही लिया जाएगा।
निचली अदालत पहले ही यह मान चुकी है कि लालू यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
