होली की खुशियां मातम में बदलीं
बिहार के सीतामढ़ी जिले में होली का त्योहार उस समय मातम में बदल गया, जब सेप्टिक टैंक में गिरे एक व्यक्ति को बचाने की कोशिश में चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना बोखरा प्रखंड के कुरहर पंचायत के वार्ड संख्या 13 की है, जहां मंगलवार शाम यह भयावह हादसा हुआ।
बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति शौचालय की टंकी (सेप्टिक टैंक) में गिर गया था। उसे बचाने के लिए एक-एक कर लोग टैंक के अंदर उतरते गए, लेकिन अंदर भरी जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण सभी की हालत बिगड़ती चली गई। देखते ही देखते सात लोग अचेत हो गए, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
चार लोगों की गई जान, तीन की बची जिंदगी
ग्रामीणों की तत्परता से सभी को किसी तरह टैंक से बाहर निकाला गया और नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चार लोगों की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें सदर अस्पताल, सीतामढ़ी रेफर किया गया।
इलाज के दौरान पिता-पुत्र समेत चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान राजीव सहनी (40), रविन्द्र सहनी (30), विनय सहनी (26) और 12 वर्षीय कृष्ण कुमार के रूप में हुई है। सभी मृतक कुरहर पंचायत के निवासी बताए जा रहे हैं।
घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। जिन घरों में सुबह तक होली के रंग उड़ रहे थे, वहां अब चीख-पुकार और रोने की आवाजें गूंज रही हैं।
पुलिस की जांच जारी
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले पर जानकारी देते हुए अमित रंजन (एसपी, सीतामढ़ी) ने बताया कि सेप्टिक टैंक की गहराई अधिक थी और अंदर पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था। जहरीली गैस के कारण दम घुटने से यह हादसा हुआ।
उन्होंने कहा कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अवैध गतिविधि की भी चर्चा
स्थानीय स्तर पर कुछ लोग यह भी दावा कर रहे हैं कि टैंक के अंदर अवैध रूप से शराब बनाने का काम किया जाता था, जिससे जहरीली गैस का रिसाव हुआ। हालांकि पुलिस ने इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सेप्टिक टैंक या किसी भी बंद स्थान में बिना सुरक्षा उपकरण और पर्याप्त वेंटिलेशन के प्रवेश न करें, क्योंकि ऐसे स्थानों में जहरीली गैस जानलेवा साबित हो सकती है।
सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल
यह हादसा एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेप्टिक टैंक या सीवर लाइन में उतरने से पहले गैस की जांच, ऑक्सीजन की उपलब्धता और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य होने चाहिए।
होली जैसे पर्व पर हुई इस दर्दनाक घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। रंगों के त्योहार में घुली इस चीख ने चार जिंदगियां छीन लीं और दो परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया।
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