श्रीनगर/तेहरान: बमबारी के साए में ईरान में फंसे 1200 भारतीय छात्र, सुरक्षित निकासी की मांग तेज, पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान में रह रहे लगभग 1200 भारतीय छात्र दहशत के माहौल में जिंदगी गुजार रहे हैं। 28 फरवरी से ईरान में जारी अमेरिकी और इजराइल के हवाई हमलों के बाद हालात और भी गंभीर हो गए हैं। खासकर उर्मिया शहर में ताजा एयरस्ट्राइक के बाद भारतीय छात्रों में भय और असुरक्षा की भावना गहरा गई है। छात्र संगठनों ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर सुरक्षित स्थानों पर भेजने की मांग की है।
जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने बताया कि उर्मिया में जिस छात्रावास में भारतीय छात्र रह रहे हैं, वहां से महज 300 मीटर की दूरी पर जोरदार धमाका हुआ। इस धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पूरी इमारत हिल गई। उन्होंने कहा, “छात्रों ने हमें बताया कि विस्फोट के बाद से माहौल बेहद तनावपूर्ण है। हर घंटे लड़ाकू विमानों की आवाज सुनाई देती है, जिससे लगातार डर और अनिश्चितता बनी हुई है।”
जानकारी के अनुसार, उर्मिया और तेहरान सहित विभिन्न शहरों में पढ़ाई कर रहे अधिकतर छात्र एमबीबीएस के हैं। ये छात्र विभिन्न मेडिकल यूनिवर्सिटियों में अध्ययनरत हैं और अपने कोर्स के अंतिम चरण में हैं। 23 फरवरी को तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी कर सभी भारतीय नागरिकों—छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों—को कमर्शियल फ्लाइट या उपलब्ध अन्य परिवहन साधनों से जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी थी।
हालांकि, कई छात्रों ने दूतावास की सलाह के बावजूद तत्काल ईरान नहीं छोड़ा। इसकी बड़ी वजह 5 मार्च को निर्धारित प्री-इंटर्नशिप परीक्षा और अन्य सेमेस्टर परीक्षाएं थीं। छात्रों का कहना है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन से परीक्षाएं स्थगित करने का अनुरोध किया, लेकिन अधिकारियों ने इनकार कर दिया। ऐसे में वे परीक्षा और सुरक्षा के बीच फंस गए।
इस बीच 28 फरवरी को हुए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबरों ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है। राजधानी तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और हवाई हमलों का सिलसिला जारी है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर पड़ा है, जिससे छात्रों की सुरक्षित वापसी और जटिल हो गई है।
छात्र संगठनों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में छात्रों की जान जोखिम में है। उन्होंने विदेश मंत्रालय से विशेष उड़ानों या सुरक्षित कॉरिडोर की व्यवस्था कर चरणबद्ध निकासी की मांग की है। परिजनों में भी भारी चिंता का माहौल है। कई अभिभावकों ने केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील की है।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है। जरूरत पड़ने पर विशेष निकासी अभियान चलाने पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर अभी किसी बड़े ऑपरेशन की घोषणा नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। फिलहाल, ईरान में फंसे भारतीय छात्र सुरक्षित वापसी की आस लगाए हुए हैं और भारत सरकार से त्वरित कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं।
