गढ़वा/मेराल। सरकार की महत्वाकांक्षी अबुआ आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई पात्र परिवार आज भी आवास से वंचित हैं। इसी बीच मेराल प्रखंड क्षेत्र के संगबरिया पंचायत के राजहरा गांव निवासी अनवर अंसारी के पत्नी रबीना खातून ( 23 ) ने आवास के अभाव में उपजे पारिवारिक विवाद में जहर खाकर अपनी जान दे दी।
इस घटना के बाद सरकारी आवास योजनाओं के क्रियान्वयन और पंचायत स्तर पर उनकी निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, लंबे समय से पक्का घर नहीं मिलने के कारण दंपती के बीच अक्सर विवाद होता था। बताया जाता है कि इसी बात को लेकर हुए विवाद के बाद महिला ने आक्रोश और मानसिक तनाव में जहरीला पदार्थ खा लिया। परिजनों द्वारा उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जरूरतमंद परिवार को समय पर सरकारी आवास मिल जाता तो संभवतः यह दुखद घटना टाली जा सकती थी। लोगों का आरोप है कि कई पात्र परिवार वर्षों से आवास योजना की सूची में नाम जुड़ने और स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ अपात्र लोगों को लाभ मिलने की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।
ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर आवास योजनाओं के चयन और अनुशंसा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पात्र लाभुकों का सही चयन नहीं होने और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी के कारण गरीब परिवार आज भी कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं।
यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ आखिर वास्तविक जरूरतमंदों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है। यदि समय पर पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जाता, तो शायद एक परिवार उजड़ने से बच सकता था।
BDC प्रतिनिधि का ब्यान:
बीडीसी प्रतिनिधि रमेश बैठा ने आवास के अभाव में महिला की हुई मौत पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना अत्यंत पीड़ादायक और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली है। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अबुआ आवास योजना एवं प्रधानमंत्री आवास योजना संचालित कर रही है, लेकिन यदि कोई जरूरतमंद परिवार आज भी आवास से वंचित है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि मृतका का परिवार वास्तव में पात्र होने के बावजूद आवास योजना के लाभ से वंचित रहा है, तो संबंधित स्तर पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही क्षेत्र के सभी पात्र एवं आवासविहीन परिवारों का सर्वे कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
