बेरमो/बोकारो: तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय सूर्य मणि त्रिपाठी की अदालत ने दहेज के लिए पत्नी की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए रहावन ओपी क्षेत्र के झुमरा निवासी दीपक महतो को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को तेनुघाट जेल भेज दिया गया।
मामले के अनुसार, रांची के खेलगांव थाना क्षेत्र स्थित गाड़ी होटवार निवासी अजय महतो ने प्राथमिकी में बताया था कि उनकी बहन सुनीता कुमारी की शादी 10 मई 2022 को दीपक महतो से हुई थी। शादी के लगभग एक माह तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन इसके बाद आरोपी ने दहेज की मांग को लेकर सुनीता को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। शिकायत मिलने पर मायके पक्ष ने एक मोटरसाइकिल भी दी थी।
अजय महतो के अनुसार, 3 जनवरी 2024 को सुनीता ने एक पुत्र को जन्म दिया। इसके कुछ समय बाद आरोपी दीपक महतो ने 50 हजार रुपये की अतिरिक्त दहेज की मांग शुरू कर दी। आरोप है कि दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर दीपक महतो, उसके दोनों भाई और अन्य परिजनों ने सुनीता के साथ मारपीट और मानसिक उत्पीड़न किया।
बताया गया कि 8 मार्च 2024 को दीपक महतो सुनीता और उसके बच्चे को मायके छोड़ गया। इसके बाद 27 मार्च 2024 को सुनीता की मां मीना देवी उसे लेकर ससुराल पहुंचीं, जहां परिजनों ने उनके साथ गाली-गलौज की। 29 मार्च को समझाने-बुझाने के बाद वह वापस लौट आईं। उसी दिन कुछ देर बाद सुनीता की गोतनी का फोन आया और बताया कि उसकी तबीयत गंभीर है तथा उसे अस्पताल ले जाया गया है। करीब आधे घंटे बाद फिर सूचना मिली कि सुनीता की मौत हो गई है।
सूचना मिलने पर अजय महतो अपने परिजनों और गांव के लोगों के साथ सुनीता के ससुराल पहुंचे। वहां उन्होंने सुनीता का शव एक बोलेरो वाहन की बीच वाली सीट पर पड़ा देखा। इसके बाद अजय महतो ने आरोप लगाया कि दीपक महतो समेत उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने साजिश के तहत सुनीता की हत्या कर दी।
इस बयान के आधार पर जागेश्वर बिहार थाना में कांड संख्या 7/2024 दर्ज किया गया। पुलिस जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया और मामला सत्रवाद संख्या 214/2024 के रूप में जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय सूर्य मणि त्रिपाठी की अदालत में विचारण के लिए स्थानांतरित हुआ।
सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दीपक महतो को दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित कर उसकी हत्या करने का दोषी ठहराया। इसके बाद अदालत ने उसे 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक सर्वेश आनंद सिंह ने पैरवी की।
